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कर बचत मीयादी जमा
   
योजना का नाम :
ओरियन्टल बैंक कर बचत. मीयादी जमा योजना (आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत)
   
इस योजना के तहत कौन राशि जमा करा सकता है :
कोई व्यक्ति अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) जिनके पास स्थायी खाता संख्या (PAN) हो
   
जमाराशि का प्रकार
सावधि जमा अथवा संचयी जमा
   
क) एकल धारक जमा खाता
  एकल धारक प्रकार की जमा रसीद किसी व्यक्ति को उसके लिए अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार के कर्ता की हैसियत से जारी की जाएगी ।
   
ख) संयुक्त धारक जम खाता
  संयुक्त धारक प्रकार की जमा रसीद संयुक्त रूप से दो वयस्कों को अथवा एक वयस्क को और एक अवयस्क को संयुक्त रूप से जारी की जाएगी और या तो धारक को अथवा उत्तरजीवी को देय होगी । परन्तु, संयुक्त धारक जमा खाते में, आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आय से कटौती केवल पहले जमाधारक को उपलब्ध होगी ।
   
IIक) सावधि जमा
  सावधि जमा में ब्याज के मासिक अथवा तिमाही भुगतान का विकल्प उपलब्ध है ।
   
ख) संचयी जमा
  तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि दर से ब्याज लगाया जाता है जो परिपक्वता पर मूल राशि के साथ देय है ।
 
निवेश की राशि
जमाकर्ता एक वर्ष में 1.00 लाख रुपए तक की राशि, न्यूनतम 100/-रुपए और इसके गुणकों में जमा कर सकता है ।
 
जमा अवधि
जमा अवधि पांच वर्षों से कम नहीं होगी
 
परिपक्वता पूर्व भुगतान
इस योजना के अंतर्गत पांच वर्षों की लाक-इन-अवधि है । अतः राशि जमा करने की तारीख से 5 वर्षों की समाप्ति से पूर्व इस मीयादी जमा को भुनाया नहीं जा सकता ।
ब्याज दर (20.03.2007 से प्रभावी)
  • वरिष्ठ नागरिकों अथवा अन्य व्यक्तियों के लिए - 9.00%
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए - 9.50%
 
जमारसीद जारी करना
जमा रसीद में, जमाकर्ता के नाम, पते, स्थायी खाता संख्या (पैन) के अतिरिकत योजना का नाम, अन्य सामान्य विवरण जैसे कि तारीख, अवधि, राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तारीख, संचयी जमा रसीद के मामले में परिपक्वता मूल्य अथवा सावधि जमा रसीद के मामले में ब्याज के भुगतान की आवधिकता (मासिक अथवा तिमाही) का उल्लेख होगा ।
   
जमा रसीद गिरवी रखना
कर बचत जमा रसीद को किसी प्रकार का ऋण लेने के लिए गिरवी नहीं रखा जाएगा न ही किसी अन्य आस्ति हेतु प्रतिभूति के तौर पर रखा जाएगा । दूसरे शब्दों में, जमा रसीद (-दों) के ग्रहणाधिकार (लिएन)/गिरवी रखकर किसी प्रकार का कोई अग्रिम नहीं दिया जा सकता जिसमें किसी आस्ति, अग्रिम, गारंटी अथवा साख-पत्र लेने के लिए संपार्श्विक प्रतिभूति भी शामिल है । इस प्रयोजन के लिए मीयादी जमा रसीद पर "कोई ग्रहणाधिकर/कोई ऋण नहीं" आशय की एक मुहर लगाई जाएगी ।
 
मीयादी जमा का नवीकरण
इस योजना में परिपकवता पर मीयादी जमा का नवीकरण सरकार द्वारा यथा अधिसूचित और समय-समय पर लागू तरीके से किया जाएगा । तथापि, सामान्य मीयादी जमा योजना में नवीकरण किया जाएगा अर्थात् इस योजना से राशि को सामान्य मीयादी जमा योजना में अंतरित करके किन्तु उस पर आय कर से छूट प्राप्त नहीं होगी ।
 
गुम हुई अथवा नष्ट हुई जमा मीयादी जमा रसीद के स्थान पर डुप्लीकेट रसीद जारी करना
 
क) यदि मीयादी जमारसीद, गुम, चोरी,नष्ट, खराब हो जाए या फट जाए तो इसका हकदार व्यक्ति जारीकर्ता शाखा में डुप्लीकेट रसीद जारी करने का आवेदन कर सकता है ।
 
ख) ऐसे प्रत्येक आवेदन पत्र के साथ रसीद की संख्या, राशि और तारीख संबंधी विवरण दिए जाएं और गुम, चोरी, नष्ट, कटे-फटे या खराब होने की स्थितियों का उल्लेख किया जाए ।
 
ग) यदि प्रभारी मीयादी जमा रसीद के गुम, चोरी, नष्ट, कटे-फटे अथवा खराब होने के संबंध में संतुष्ट हो तो वह आवेदक द्वारा एक अथवा अधिक अनुमोदित प्रतिभू अथवा बैंक गारंटी सहित निर्धारित फार्म में क्षतिपूर्ति बांड दिए जाने पर डुप्लीकेट रसीद जारी करेगा । ऐसी रसीद के मुख्य पृष्ठ पर इस तथ्य का उल्लेख होगा कि यह रसीद गुम हुई रसीद संख्या____ के स्थान पर जारी की गई है ।
  1. किन्तु यदि गुम, चोरी, नष्ट हुई कटी-फटी अथवा खराब हुई जमा रसीद की राशि पांच सौ रूपए अथवा इससे कम हो तो बिना किसी प्रतिभू अथवा गारंटी के आवेदक द्वारा क्षतिपूर्ति बांड दिए जाने पर डुप्लीकेट रसीद अथवा रसीदें जारी की जा सकती हैं ।
  2. यह भी कि यदि कटी-फटी या खराब रसीद के संबंध में आवेदन किए जाने पर, चाहे उसका अंकित मूल्य कितना भी हो, यदि ऐसी कटी-फटी या खराब रसीद शाखा में वापस कर दी जाए और रसीद इस योग्य हो कि यह पहचाना जा सके कि यह मूल रूप से जारी रसीद ही है तो बिना किसी क्षतिपूर्ति बांड, प्रतिभू अथवा गारंटी के डुप्लीकेट रसीद जारी की जा सकती है ।
घ) उप पैराग्राफ (11-सी) के तहत जारी डुप्लीकेट रसीद को इस योजना के तहत सभी प्रयोजनों के लिए मूल रसीद के बराबर माना जाएगा किन्तु यह जिस शाखा में जारी की गई है , उसके अतिरिक्त अन्य शाखा अथवा बैंक में पूर्व सत्यापन के बिना भुनाई नहीं जा सकेगी ।
 
नामांकन
क) इस योजना के तहत, मीयादी जमाराशि के एकल धारक अथवा संयुक्त धारक किसी भी व्यक्ति को नामित कर सकते हैं, जो एकल धारक/दोनों संयुक्त धारकों, जैसा भी मामला हो, की मृत्यु होने की स्थिति में जमाराशि का और उस पर देय भुगतान का हकदार होगा ।
 
ख नामित (नामितियों) का/के नाम, जैसा भी मामला हो, का उल्लेख जमा रसीद के मुखपृष्ठ पर किया जाए ।
 
ग) अवयस्क की ओर से अथवा उसके द्वारा रखे गए और आवेदित मीयादी जमा के संबंध में कोई नामांकन नहीं किया जाएगा ।
 
घ) मीयादी जमा के धारक की मृत्यु होने के मामले में, जिसमें नामांकन किया गया हो , नामिति मीयादी जमा की परिपक्वता से पूर्व अथवा परिपक्वता के बाद किसी भी समय बैंक के मानकों के अनुसार मीयादी जमाराशि को भुनाने का हकदार होगा/होंगे
 
ड) भुगतान के प्रयोजन हेतु, उत्तरजीवी नामिती शाखा प्रबन्धक को एक आवेदन पत्र देगा अथवा देंगे जिसके साथ धारक की मृत्यु का प्रमाण दिया जाए ।
 
च) यदि एक से अधिक नामिती हो, तो सभी नामिती भुगतान प्राप्त करते समय रसीद का संयुक्त उन्मोचन करेंगे ।
 
कानूनी वारिसों को भुगतान : यदि मीयादी जमा धारक की मृत्यु हो जाती है और उसकी मृत्यु के समय कोई नामांकन न हो तो उसके कानूनी वारिसों को, बैंक के मानदंडों के अनुसार मृत व्यक्ति को देय राशि का दावा करने का अधिकार है ।
 
एक शाखा से दूसरी शाखा में अंतरण : मीयादी जमा खाता का अंतरण एक शाखा से किसी अन्य शाखा में किया जा सकता है । इसके लिए जमाकर्ता को दोनों शाखाओं में से किसी में भी आवेदन करना होगा । ऐसे प्रत्येक आवेदन-पत्र पर मीयादी जमा रसीद के धारक द्वारा हस्ताक्षर किए जाएं ।
 
परन्तु, संयुक्त जमा खातों में, एक खाताधारक की मृत्यु होने पर, आवेदन-पत्र पर अन्य संयुक्त धारक द्वारा हस्ताक्षर किए जा सकते हैं ।
 
आयकर से छूट :
क) आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 80 सी के तहत 1.00 लाख रुपए की अधिकतम सीमा के अध्यधीन मूल राशि पर आयकर से छूट प्राप्त है । इस सीमा में पीएफ, पीपीएफ, एनएससी, बीमा प्रीमियम, इंफ्रास्ट्रक्चर बांड इत्यादि जैसी अन्य योजनाओं में निवेश भी शामिल है ।

ख) इन जमाराशियों पर प्राप्त ब्याज पर आयकर अधिनियम की धारा 194 ए अथवा धारा 195 के अंतर्गत कर लगेगा । तदनुसार, ब्याज की राशि पर स्रोत पर कर की कटौती (टीडीएस) की जाएगी ।

ग) अन्य मीयादी जमा योजनाओं की भांति तथा सरकारी मार्गनिर्देशों के अनुसार जहां लागू हो, 15 एच/15 जी फार्म दिया जाए