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अनिवासी भारतीय ग्राहक -सुविधाएं
ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स को अनिवासी भारतीयों से अपने संबंधों पर गर्व है और वह इनकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाए गए विभिन्न उत्पादों के जरिए अनिवासी भारतीयों को सेवाएं प्रदान करने में गौरव महसूस करता है ।
   
ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स की देशभर में 1320 शाखाएं हैं व विस्तार पटल हैं और 890 ऑन साइट /आफ साइट एटीएम हैं । ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स के सभी सेवा केद्र पूर्णतः कम्प्यूटरीकृत हैं और 1000 से अधिक शाखाएं सीबीएस , इन्टरनेट बैंकिंग और फोन बैंकिंग से जुड़ी हुई हैं । इस प्रकार ओबीसी की भी किसी शाखा का ग्राहक सभी सीबीएस शाखाआंट का ग्राहक है क्योंकि हम अपने सीबीएस ग्राहकों को किसी भी शाखा से बैंकिंग (एबीबी) और बहुनगरीय चेकबुक सुविधा प्रदान करते हैं । बैंक के छः लाख से अधिक प्रोटोन, वीज़ा डेबिट कार्डधारक मित्र (MITR) और एनएफएस से जुड़ी 8000 से अधिक एटीएम का लाभ उठा सकते हैं और नगद जमा/आहरण, मोबाइल टॉपअप, लघु विवरणी , शेष संबंधी पूछताछ इत्यादि सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और भारत में तथा विदेशों में 50000 से अधिक बिक्री केद्रों (पीओएस) के जरिए खरीदारी करने हेतु कार्ड से भुगतान कर सकते हैं ।
   
हम यहां अपने सम्मानित अनिवासी भारतीयों के लिए ओबीसी द्वारा प्रदान की जा रही विदेशी मुद्रा विनिमय तथा बैंकिंग सुविधाओं का विवरण तथा मौजूदा निवेश व सरकारी /भारतीय रिजर्व बैंक के अन्य मार्गनिर्देश निम्नानुसार दे रहे हैं :-
   
अनिवासी भारतीयों को दी जा रही सुविधाएं
भारत को प्रेषण :
प्रभावी रूप से आवक प्रेषण भेजने की दृष्टि से ओबीसी ने विश्वभर में लगभग सभी मुख्य अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ प्रतिनिधि बैंक स्थापित किए हैं । ओबीसी विदेशी मुद्रा खाते खोलता है जिसमें अनिवासी भारतीय किसी भी प्रमुख मुद्रा जैसे कि पोंड स्टर्लिंग, अमरीकी डॉलर, यूरो, जापानी येन, केनेडीयन डालर, आस्ट्रेलियन डालर, सिंगापुर डालर, स्विस प्रें, हांगकांग डालर इत्यादि में स्विफ्ट/तार अंतरण /मांग ड्राप्ट के जरिए विश्व के किसी भी कोने से राशि भेज सकते हैं । ओबीसी ने 2500 अमरीकी डालर अथवा इसकी समतुल्य राशि तक प्रेषण भेजने के लिए वेस्टर्न यूनियन के साथ भी समझौता किया है और मिडिल इस्ट देशों से राशि के अंतरण के लिए तीन विनिमय गृहों के साथ प्रबन्ध किए हैं ।
   
जमा खाते :
अनिवासीय भारतीय निम्नलिखित खाते खोल सकते हैं । इसके लिए वह खाता खोलने का फार्म , विभिन्न प्रकार के खातों पर प्रस्तावित वर्तमान ब्याज दरें एवं अन्य जानकारी हमारी वेबसाइट www.obcindia.co.in से प्राप्त कर सकते हैं ।
   
2() विदेशी मुद्रा (अनिवासी)खाता (बैंक) योजना :
  इस योजना के तहत अनिवासी भारतीय को पौंड स्टर्लिंग, अमरीकी डालर, कनाडियन डालर, आस्ट्रेलियन डालर, यूरो और जापानी येन में न्यूनतम 1 वर्ष अधिकतम 5 वर्ष की परिपक्वता अवधि के मीयादी जमाखाते खोलने का विकल्प प्राप्त है । इन खातों में ब्याज आय और शेष राशि सभी भारतीय करों से मुक्त है । इन निधियों का प्रत्यावर्तन, भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना किया जा सकता है ।
   
2() अनिवासी बाह्य (रुपया) खाता :
  इस एनआरई जमा योजना के तहत अनिवासी भारतीय अपनी विदेशी मुद्रा निधियों को भारतीय रूपयों में परिवर्तित करके सभी प्रकार के खाते जैसे कि चालू, बचत, सावधि , संचयी और आवर्ती जमा खाते रूपए में खोल सकते हैं । इन खातों में रखी राशि तथा उस पर अर्जित ब्याज सभी प्रकार के भारतीय करों से मुक्त हैं । इन निधियों का प्रत्यावर्तन, भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना किया जा सकता है । इन खातों में रखी राशि को नीचे पैराग्राफ 3 () और () में बताए अनुसार प्रत्यावर्तनीय और गैर प्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश भी किया जा सकता है ।
   
2() अनिवासी सामान्य रूपया खाते :
  यह एनआरओ खाते चालू , बचत, सावधि , संचयी और आवर्ती जमा के रूप में भारतीय रूपयों में , वर्तमान घरेलू जमाखातों को एनआरओ में बदलकर अथवा अनिवासी भारतीयों द्वारा भेजे गए विदेशी प्रेषण के जरिए भी खोले जा सकते हैं । एनआरओ खातों की निधियों का मुक्त उपयोग भारत में सभी प्रकार के रुपया भुगतान , निवेश, अचल सम्पत्तियों की खरीद इत्यादि के लिए किया जा सकता है ।
   
अनिवासी खाते खोलने की प्रक्रिया
ऊपर पैराग्राफ 2 क से 2 ग में दिए गए अनिवासी खाते खोलने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता है :
   
पहचान/पते का प्रमाण जैसे कि पासपोर्ट/अंतरराष्ट्रीय ड्राईविंग लाइसेंस अथवा भारत के बाहर उनके बैंकर द्वारा अथवा भारतीय दूतावास अथवा आयोग के किसी अधिकारी द्वारा उसके मोहर अथवा हस्ताक्षर सहित खाता खोलने के फार्म का सत्यापन/प्रस्तावित खाताधारक के पासपोर्ट आकार के दो फोटोग्राफ और नमूना हस्ताक्षर दिए जाएं ।
   
विशेष सुविधाएं
1 () प्रतिरक्षा सुविधा
  विदेशी मुद्रा (अनिवासी) खाता (बैंक) योजना और अनिवासी बाह्य (रूपया) खातों में रखी गई निधियों तथा उन पर अर्जित ब्याज के लिए प्रतिरक्षा सुविधा भी उपलब्ध है ।
   
1 () अनिवासी सामान्य खातों (NRO) के तहत प्रेषण का प्रावधान
  वर्तमान फेमा मार्गनिर्देशों के अनुसार निवासी भारतीय एक मिलियन अमरीकी डालर अथवा इसके समतुल्य मुद्रा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एनआरओ खाते में रखी निधियों में से प्रेषित कर सकते हैं । इसमें अचल सम्पत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि भी शामिल है । आवासीय सम्पत्तियों के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना उपरोक्त सीमा तक ऐसी दो सम्पत्तियों की बिक्री राशि प्रेषित की जा सकती है ।
   
अनिवासी भारतीयों हेतु ऋण योजनाएं
   
2() बैंक जमाराशियों की जमानत पर ऋण
  अनिवासी भारतीय अपने एनआरओ , एनआरई और एफसीएनआर (बी) मीयादी जमाराशियों की जमानत पर अपने कारोबार संबंधी कार्य करने के लिए अथवा निजी प्रयोजन हेतु, भारत में प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए अथवा अपने आवासीय प्रयोग के लिए भारत में प्लैट /घर खरीदने के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं । निवासी व्यक्तियों/फर्मों/कम्पनियों को भी अनिवासी भारतीयों द्वारा रखे गए मीयादी जमाराशियों की जमानत पर किसी प्रकार के निधि आधारित और /अथवा गैर निधि आधारित कार्यों के लिए ऋण उपलब्ध है बशर्ते कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी कुछेक मार्गनिर्देशों का पालन किया जाए । अनिवासी भारतीय एनआरई /एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के प्रति भारत के बाहर स्वयं के लिए अथवा अन्य पार्टियों के लिए विदेशों में हमारे प्रतिनिधि बैंकों के जरिए सदभावपूर्ण प्रयोजनों के लिए ऋण ले सकते हैं ।
  टिप्पणी : अनिवासी/अन्य पक्ष को अनिवासी बाह्य रूपया खाता/विदेशी मुद्रा अनिवासी एफसीएनआर (बी.) जमाराशियों की जमानत पर ऋण
   
  भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 31.01.2007 के अपने परिपत्र संख्याः भारिबैं/2006-07/244/.पी (डीआइआर सीरिज) संख्याः 29 के जरिए विषयक योजना पर संशोधित मार्गनिर्देश जारी किए हैं । 31.01.2007 से अनिवासी भारतीयों को उनकी अपनी अनिवासी बाह्य रूपया खाता और विदेशी मुद्रा अनिवासी खातों एफसीएनआर (बी) में रखी गई जमाराशियों की जमानत पर और इन जमाराशियों के प्रति अन्य पक्षों को दिए जाने वाले ऋण की अधिकतम मात्रा 20 लाख रुपए से अधिक नही होगी । इसके अतिरिक्त, 20 लाख रुपए की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करने के लिए ऋण राशि में कृत्रिम कटौती करने की अनुमति नहीं है ।
   
2() अचल सम्पत्ति की जमानत पर ऋण
  अनिवासी भारतीय चाहे कितनी भी आवासीय/वाणिज्यिक सम्पत्ति खरीदने के लिए आवास ऋण ले सकते हैं । अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति जिनके पास बंगलादेश , पाकिस्तान, शलंका, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, नेपाल और भूटान की नागरिकता है, उन्हें भारत में अचल सम्पत्ति (-यां) खरीदने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्वानुमति लेना आवश्यक है । ऋण की राशि का उपयोग अनिवासी भारतीय की निधि / कारोबारी आवश्यकताओं के लिए भारत में ही किया जा सकता है। ऋण की चुकौती विदेश से भेजी गई राशि अथवा एनआरओ/एनआरई /एफसीएनआर (बी) खातों से डेबिट द्वारा अथवा अचल सम्पत्ति (यों) की बिक्री राशि में से किया जा सकता है ।
   
2() शेयरों /परिवर्तनीय डिबेंचरों की प्रतिभूति पर ऋण
  निवासी भारतीय शेयरों /परिवर्तनीय डिबेंचरों की जमानत पर अपने निजी अथवा कारोबारी आवश्यकता के लिए किसी भी प्रकार की निधि आधारित /गैर निधि आधारित सुविधा का लाभ उठा सकते हैं ।
   
2()  रुपए में आवास ऋण
  अनिवासी भारतीय भारत में आवासीय सम्पत्ति खरीदने के लिए बैंक अथवा गृह वित्तीयन संस्थान से रूपया ऋण ले सकते हैं ।
   
2() अनिवासी भारतीय /भारतीय मूल के कर्मचारियों को रूपया ऋण
  अनिवासी भारतीय/भारत में पंजीकृत/निगमित कम्पनी के भारतीय मूल के कर्मचारी अपने निजी प्रयोग के लिए रूपया ऋण ले सकते हैं जिसमें भारत में आवासीय सम्पत्ति खरीदना शामिल है बशर्ते कि ऐसे कि ऋण की चुकौती विदेश से भेजी गई नई राशि अथवा एनआरओ/एनआरई /एफसीएनआर (बी) खातों में से की जाए ।
   
भारत में निवेश संबंधी वर्तमान मार्गनिर्देश
अनिवासी भारतीय निम्नलिखित योजनाओं के तहत भारत में निवेश कर सकते हैं :
   
3() 100 प्रतिशत प्रत्यावर्तनीय आधार पर :
  सरकारी प्रतिभूतियों, राजकोषीय बिलों, म्युचअल फंडों की यूनिटों , सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी बांड और शेयर, स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीदे और बेचे गए शेयरों में पोर्टफोलियो निवेश । भारत में यथालागू करों के भुगतान के पश्चात बिक्री राशि भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना विदेश भेजी जा सकती है बशर्ते कि ऐसे निवेश विदेशी मुद्रा के प्रेषण द्वारा अथवा अनिवासी भारतीय के एनआरई /एफसीएनआर (बी) खातों से किए गए हों । 1
   
3() गैर प्रत्यावर्तनीय आधार पर
  किसी फर्म अथवा स्वामित्व वाले प्रतिष्ठान की पूंजी में असीमित निवेश । सरकारी प्रतिभूतियों , राजकोषीय बिल, म्युचुअल फंड की यूनिटों , राष्ट्रीय योजना/बचत प्रमाणपत्र में निवेश । शेयरों और परिवर्तनीय डिबेंचरों में निजी स्थापन के जरिए निवेश बशर्ते कि भारतीय कम्पनी कृषि/बागवानी कार्य न करती हो अथवा स्थावर संपदा कारोबार अथवा फार्म हाऊस का निर्माण अथवा विकास अधिकारों के अंतरण का कार्य अथवा प्रिंट मीडिया का कार्य न करती हो । स्टॉक एक्सचेंज के दलालों के जरिए शेयरों और परिवर्तनीय डिबेंचरों में पोर्टफोलियो निवेश बशर्ते कि निर्धारित शर्तों को पूरा किया जाए , उपर्युक्त प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त राशि भारत में यथालागू करों के भुगतान के बाद और भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुमति लेने के पश्चात भारत के बाहर प्रत्यावर्तित की जा सकती है ।
   
3() अचल सम्पत्ति में निवेश
  आवासीय/वाणिज्यिक सम्पत्ति की खरीद हेतु किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है । अनिवासी भारतीयों द्वारा कितनी भी संख्या में आवासीय/वाणिज्यिक सम्पत्तियां खरीदी जा सकती हैं । सम्पत्ति की खरीद के पश्चात भारतीय रिवर्ज बैंक को कोई विवरणी/फार्म जमा कराने की जरूरत नहीं है । कृषि/बागवानी सम्पत्ति/फार्म हाऊस खरीदने की अनुमति नहीं है । भारत के निवासी से उपहार अथवा उत्तराधिकार के जरिए आवासीय/वाणिज्यिक सम्पत्ति प्राप्त की जा सकती है । सम्पत्ति लेने के लिए खरीद के मूल्य की व्यवस्था विदेशी मुद्रा में प्राप्त नई राशि अथवा अनिवासी के एनआरई/एफसीएनआर (बी) के खाते को डेबिट करके किया जाए । इस प्रकार प्राप्त सम्पत्तियां भारत के निवासी व्यक्ति को ही बेची जा सकती हैं । ऐसी सम्पत्तियां अन्य अनिवासी भारतीय अथवा भारतीय मूल के किसी व्यक्ति को , भारतीय रिवर्ज बैंक की अनुमति प्राप्त करने के बाद ही बेची जा सकती हैं । वाणिज्यिक सम्पत्तियों की बिक्री की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है । आवासीय सम्पत्ति के मामले में केवल दो सम्पत्तियों के संबंध में , एक मिलियन अमरीकी डालर अथवा इसके समतुल्य राशि की समग्र सीमा के तहत यथालागू भारतीय करों का भुगतान करने के पश्चात बिक्री की राशि का प्रेषण भारत के बाहर किया जा सकता है । अचल सम्पत्ति की बिक्री हेतु अथवा इसकी राशि का प्रेषण विदेश में करने के लिए कोई लॉक-इन-अवधि नहीं है । इस प्रकार प्रत्यावर्तनीय, बिक्री की राशि, सम्पत्तियों के खरीद के लिए भारत में लाई गई विदेशी मुद्रा अथवा एनआरई/एफसीएनआर (बी) खातों में डेबिट की राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए ।
   
भारतीय मूल के व्यक्ति हेतु कार्ड योजना
4() बांगलादेश अथवा पाकिस्तान के नागरिकों को छोड़कर भारतीय मूल के व्यक्ति पीआईओ कार्ड प्राप्त करने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, यदि :-
 
  • किसी भी समय उसके पास भारतीय पासपोर्ट रहा हो अथवा या तो वह अथवा उसके माता-पिता में कोई एक अथवा उसके दादा-दादी अथवा परदादा-परदादी में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो और भारत सरकार अधिनिमय 1935 में यथापरिभाषित भारत का और अन्य प्रदेशों का जो इसके बाद भारत का अंग हो गए हैं, स्थायी निवासी हो बशर्ते कि इनमें से कोई भी केद्र सरकार द्वारा समय-समय पर यथानिर्दिष्ट किसी देश का नागरिक न रहा हो; अथवा जिसका पति/पत्नी भारत का नागरिक हो अथवा उपर्युक्तानुसार भारतीय मूल का व्यक्ति हो ।
  • इस योजना का आधार व्यापक है जिसमें चार पीढ़ियों को शामिल किया गया है और भारतीय नागरिक की विदेशी पति/पत्नी अथवा भारतीय मूल के व्यक्ति को भी शामिल किया गया है । 4 () पीआईओ कार्डधारक आर्थिक, वित्तीय क्षेत्रों में सभी सुविधाओं का लाभ उठाने और भारत के शैक्षिक स्थानों जिसमें मैडिकल कालेज , इंजीनियरिडग कालेज, प्रौद्योगिकी संस्थान , प्रबन्ध संस्थान इत्यादि शामिल हैं , में प्रवेश लेने हेतु अनिवासी भारतीय के समकक्ष है ।
  • आपको और भारत में व विदेशों में आपके मित्रों को सेवाएं देने में हमें आनन्द व गर्व प्राप्त होगा । आप ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स के संबंध में अन्य विवरणों की जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट www.obcindia.co.in पर सम्पर्क करें और हमारे सम्मानित ग्राहकों के लिए प्रस्तावित उत्पादों और सेवाओं की विस्तृत श्ञंखला की जानकारी प्राप्त करें । किसी भी शंका के लिए आप निम्न ई-मेल आईडी का प्रयोग करें।